कासगंज के न्यौली में बारिश का कहर: हजारों बीघा फसल जलमग्न, किसान पानी में उतरकर बची फसल निकालने को मजबूर
चार से पांच फीट पानी में डूबी फसलें, धान और मक्का निकालने को किसान परेशान

कासगंज। जनपद कासगंज के ग्राम न्यौली में पिछले दिनों हुई बारिश किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। लगातार बारिश के बाद गांव और आसपास के खेतों में भारी मात्रा में पानी भर गया है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 100 से अधिक किसानों की मक्का और धान की फसलें जलमग्न हैं। कई खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भरा हुआ है, जिसके चलते किसानों के सामने फसल बचाने के साथ-साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

जहां कुछ दिन पहले तक खेतों में हरी-भरी मक्का और धान की फसलें लहलहा रही थीं, वहीं अब उन्हीं खेतों में दूर-दूर तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। हालात इतने खराब हैं कि किसान अपनी फसल को बचाने के लिए चार से पांच फीट तक गहरे पानी में उतरकर खेतों से फसल काटकर बाहर ला रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई किसान खुद पानी में उतरते हैं, फिर डूबी हुई फसल के बीच पहुंचकर मक्का की फसल को काटते हैं और उसे पानी से बाहर लेकर आते हैं। चार-पांच फीट पानी में खड़े होकर फसल काटना किसानों की मजबूरी बन गया है। किसान इस उम्मीद में पानी के अंदर उतर रहे हैं कि कम से कम जो फसल बची है, उसका कुछ हिस्सा घर तक पहुंचाया जा सके।

गांव के रामदास, सत्य प्रकाश, दीप सिंह, अमन सिंह और पप्पू समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे खुद पानी के बीच जाकर फसल निकाल रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी लगातार भरा हुआ है और यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो बची हुई फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।

रास्तों पर भी भरा पानी
जलभराव का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार न्यौली फार्म रोड, खड़ंजों और चकरोड सहित आसपास के कई रास्तों पर भी पानी भरा हुआ है। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
खेतों तक पहुंचना और पानी के बीच से फसल को बाहर लाना किसानों के लिए चुनौती बन गया है।
किसानों ने प्रशासन से की सर्वे और मुआवजे की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक लेखपाल या संबंधित अधिकारी के मौके पर पहुंचकर फसल नुकसान का निरीक्षण किए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है। किसानों ने मांग की है कि लेखपाल मौके पर पहुंचकर खेतों का सर्वे करें और वास्तविक फसल नुकसान का आकलन किया जाए।

ग्रामीणों ने एसडीएम सहावर से भी मामले का संज्ञान लेने और प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने का अनुरोध किया है।
किसानों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था कराए। उनका कहना है कि यदि पानी इसी तरह खेतों में जमा रहा तो मौजूदा फसल के नुकसान के साथ-साथ अगली फसल की बुवाई पर भी असर पड़ेगा।
फिलहाल न्यौली में किसानों के सामने एक तरफ चार-पांच फीट पानी में डूबी फसल है और दूसरी तरफ उस फसल को बचाने की कोशिश। किसान खुद पानी में उतरकर अपनी मेहनत की फसल को खेतों से बाहर निकाल रहे हैं और प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन कब मौके पर पहुंचकर जलभराव और फसल नुकसान का सर्वे कराता है, पानी की निकासी के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और प्रभावित किसानों को राहत कब तक मिल पाती है।


